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Bijnor Piles Centre
Proctology · Bijnor, UP
Piles HI

बवासीर से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव

DR
Dr. Parmod Kumar
19 April 2026 · 4 min read

बवासीर से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव

बवासीर (Piles/Hemorrhoids) एक ऐसी समस्या है जो आजकल हर उम्र के लोगों में तेज़ी से बढ़ रही है। लेकिन खुशखबरी यह है कि अपनी दिनचर्या और खानपान में कुछ ज़रूरी बदलाव करके आप इससे बच सकते हैं या इसकी पुनरावृत्ति रोक सकते हैं।

बवासीर क्या है?

बवासीर (Hemorrhoids) तब होती है जब गुदा नली (anal canal) या मलाशय (rectum) के आसपास की नसें सूज जाती हैं। यह आंतरिक (internal) या बाहरी (external) दोनों प्रकार की हो सकती है। इसके सामान्य लक्षण हैं — मल त्याग के समय दर्द, खुजली, जलन या खून आना।

यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो बवासीर गंभीर रूप ले सकती है। इसीलिए रोकथाम सबसे अच्छा उपाय है।

बवासीर के मुख्य कारण

  • कब्ज (Constipation): मल त्याग के समय अधिक ज़ोर लगाना बवासीर का सबसे बड़ा कारण है।
  • लंबे समय तक बैठे रहना: ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठे रहने से गुदा की नसों पर दबाव पड़ता है।
  • कम पानी पीना: शरीर में पानी की कमी मल को सख्त बनाती है।
  • कम फाइबर आहार: मैदा, तला-भुना और प्रोसेस्ड खाना कब्ज पैदा करता है।
  • मोटापा: अतिरिक्त वजन पेट और गुदा क्षेत्र पर अनावश्यक दबाव डालता है।
  • गर्भावस्था: गर्भाशय के बढ़ने से नसों पर दबाव बढ़ता है।

जीवनशैली में ये बदलाव करें — लक्षण दिखने से पहले ही

1. फाइबर युक्त आहार लें

फाइबर मल को नरम बनाता है और आंत की कार्यप्रणाली को सुचारु रखता है। प्रतिदिन कम से कम 25–30 ग्राम फाइबर लेने का लक्ष्य रखें।

2. पर्याप्त पानी पिएं

रोज़ाना कम से कम 8–10 गिलास पानी पिएं। पानी मल को मुलायम रखता है और कब्ज से बचाता है।

3. नियमित व्यायाम करें

हल्की सैर, योग, या तैराकी — रोज़ाना 30 मिनट का व्यायाम आंत की गतिविधि को बेहतर बनाता है। लंबे समय तक बैठने से बचें।

4. शौचालय की सही आदतें अपनाएं

  • जब भी शौच की इच्छा हो, तुरंत जाएं — रोकें नहीं।
  • शौचालय में मोबाइल न लेकर जाएं।
  • ज़ोर न लगाएं — 5 मिनट से ज़्यादा बैठना नुकसानदेह है।
  • इंडियन-स्टाइल शौचालय (squat position) अधिक फायदेमंद होती है।

5. वजन नियंत्रित रखें

संतुलित वजन रखने से पेट और गुदा क्षेत्र पर दबाव कम होता है और बवासीर की संभावना घटती है।

6. ज़्यादा देर बैठने से बचें

हर एक घंटे में 5 मिनट खड़े होकर टहलें। ऑफिस में कुशन वाली कुर्सी का उपयोग करें।

आहार तालिका — क्या खाएं, क्या न खाएं

खाएं ✅ न खाएं ❌
ओट्स, दलिया, रागी मैदा और सफेद ब्रेड
हरी सब्जियाँ (पालक, मेथी, लौकी) तला-भुना और मसालेदार खाना
फल (पपीता, अमरूद, सेब) जंक फूड और फास्ट फूड
दाल और छिलके वाली सब्जियाँ शराब और कैफीन
छाछ और दही अधिक नमक और अचार
भरपूर पानी और नारियल पानी कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा

बवासीर में फायदेमंद योग और व्यायाम

  • अश्विनी मुद्रा: गुदा की मांसपेशियों को मजबूत करती है।
  • पवनमुक्तासन: पेट की गैस और कब्ज में राहत देता है।
  • मलासन (गार्लैंड पोज़): पाचन तंत्र को सक्रिय करता है।
  • वज्रासन: भोजन के बाद 10-15 मिनट बैठने से पाचन बेहतर होता है।
  • तेज़ चाल से पैदल चलना: रोज़ सुबह 30 मिनट।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या सिर्फ जीवनशैली बदलाव से बवासीर ठीक हो सकती है?

हल्की (Grade 1 या 2) बवासीर में जीवनशैली और आहार सुधार से राहत मिल सकती है। लेकिन गंभीर मामलों में चिकित्सकीय उपचार जरूरी है। डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

कब्ज से बचने का सबसे आसान तरीका क्या है?

प्रतिदिन सुबह खाली पेट 2 गिलास गुनगुना पानी पिएं, रात को सोने से पहले एक छोटी कटोरी दही या छाछ लें, और अपने आहार में ओट्स या दलिया शामिल करें।

क्या बवासीर में व्यायाम करना सुरक्षित है?

हाँ, हल्का व्यायाम जैसे पैदल चलना, योग और तैराकी पूरी तरह सुरक्षित है। भारी वजन उठाने वाला व्यायाम (Weight lifting) से बचें क्योंकि इससे गुदा पर दबाव बढ़ता है।

बवासीर में पानी कितना पीना चाहिए?

कम से कम 8-10 गिलास (2-2.5 लीटर) पानी प्रतिदिन पिएं। यह मल को नरम रखता है और कब्ज को रोकता है।

निष्कर्ष

बवासीर से बचाव के लिए आपको कोई महंगी दवा नहीं चाहिए — बस अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे लेकिन स्थायी बदलाव लाने होंगे। सही आहार, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और स्वस्थ शौच की आदतें आपको बवासीर से दूर रख सकती हैं। अगर लक्षण पहले से मौजूद हैं, तो बिना देर किए किसी विशेषज्ञ से मिलें।


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